Monday, January 4, 2010

duniya ka DRAMA

संसार का नाटक

सब एक दूसरे पर हँसते हैं-
दाढ़ी वाला सरदार - चुटैया वाले पंडित पर
चोंगे वाला पादरी - झोले वाले समाजसेवी पर
टोपीवाला हाजी - तिलकधारी पुजारी पर
दिगम्बर साधक - सरमुंडे जोगी पर।
सफेद साड़ी - रंगीन साड़ी पर
गजरे वाली - बुरके वाली पर
काला गोरे पर , भूरा काले पर
टाई - पजामें पर, जूता - चप्पल पर
जींस - लुंगी पर, भगवा - हरे पर
बूढ़ा - बच्चे पर, आदमी - औरत पर।
सभी नमूने हैं अजीब
करते नौटंकी इस दुनिया में
अपनी-अपनी।

1 comment:

  1. कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
    बहुत सुन्दर रचना । आभार
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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