Monday, April 4, 2011

यहीं खुशी यहीं गम

आई हूँ अपने मायके / घर में दो कमरे हैं / बीच मे दीवार – / एक में कराह रहे हैं वो / जिनकी हूँ मैं बेटी / पिछले महीने हुए एक्‍सीडेंट के / असहय दर्द से / गर्म दूध पीते हुए / दूजे में चीख रही है वो / जो है मेरी बेटी / शादी के नौ बरस बाद / जन्‍मी पहली संतान / किलकारियां भरती हुई /दूध पीने के लिए , धूप और छांव की / अजीब जिंदगी / जी रही हूँ मैं / बेटी और मां का / संयुक्‍त फर्ज / निभाते हुए !

1 comment:

  1. सार्थक और भावप्रवण रचना।

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