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बाल उलझे रहें हाल सुलझा रहें यह कैसे संभव हैमन में हो वेदना तन चंगा रहे
यह कैसे संभव है
घर में झगड़ा हुआ
दफतर शांत रहे
यह कैसे संभव है
कुदरत उजड़ती रहे
विकास होता रहे
यह कैसे संभव है
दिन में गलतियां हो
रात नींद आया करे
यह कैसे संभव है
है सब कुछ गुंथा हुआ
तो देखें अलग अलग
यह कैसे संभव है !
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