Tuesday, February 16, 2021

मास्टर गोकुलचन्द के नाम

 याद आते हैं  मुझे

बचपन के वो दिन 

जब तख्‍ती-बुदक्का लेकर

कंधे पर भारी बस्‍ता ढोकर

मैं जाया करता था 

मंदिर वाले स्‍कूल में 

जिसे उस वक्‍त

विद्या-मंदिर नहीं कहा जाता था 

और न ही उसमें पढ़ाने वाले 

बूढ़े मास्‍टर गोकुलचन्‍द को 

सर या टीचर,

उनकी आंखें पत्‍थर की थीं 

हाथ में छड़ी रहती थी 

धोती पहनते थे गंदी-सी 

आवाज कड़क थी 

गणित उनके लिए खेल था 

बच्‍चे उनका जीवन थे 

और वह चबूतरा ही 

उनकी कुर्सी थी 

जिस पर बैठ 

वह पहाड़े याद कराते थे,

बच्‍चों से घिरे 

उन्‍हें डॉंटते-पीटते 

मुर्गा बनाते, गरियाते-झल्‍लाते 

फिर भी बार-बार समझाते ,

सॉंस चलती थी तेज 

पर लगे रहते पढ़ाने में 

दोपहर तक बिन खाये 

घंटी भी खुद ही बजाते थे 

सभी कक्षाओं को 

अकेले पढ़ाते थे 

स्‍कूल जब बंद हो जाता 

तो कोई खाना दे जाता 

खाकर और कुँए से पानी पीकर 

नीम के पेड़ तले

सुस्‍ताने के लिए 

जमीन पर ही 

पसर जाते थे, 

शाम को टहल आते थे 

बाजार की ओर 

किसी बच्‍चे का दुकानदार बाप 

मास्‍टर जी को बुलाकर 

चाय-हुक्‍का पिला देता 

घूम-फिर वे फिर आ जाते 

मंदिर में 

जहॉं थे वे खुद ही पूज्‍य और पुजारी

सिखाते बच्चों को सबक 

जिंदगी का 

वे मेरे प्रथम टीचर थे :

मास्‍टर गोकुलचन्‍द: 

सोई गॉंव के जाग्रत पुरूष।

Monday, February 15, 2021

फरवरी का आशिकाना हफ्ता

 फरवरी का आशिकाना हफ्ता 


गिफ्ट की दुकान से खरीदा हुआ  

प्‍लास्टिक का गुलाबी फूल 

बसंती के जूड़े़ में लगाकर  

चाकलेट देते हुये बोला भालू

चुंबन- आलिंगन की अम्‍मीद में

“ओ ! माई वेलेंटाइन,आई लव यू“

मिला जवाब करारा-सा बसंती से 

“अरे, मेंरे इडियट और मॉडर्न लालू !

इससे अच्‍छा तो ले आते 

सब्‍जी मंडी से  

फूलगोभी और दो किलो आलू ! “

Saturday, May 16, 2020

अ से अनार


डंडा लगा दो तो
आम बन जायेगा
आम के ऊपर
चोटी लगा दो तो
ओखली बन जायेगी
एक और चोटी बना दो
औरत बन जायेगी
अनार ही अमरूद है
बिंदी लगा दो तो
दोनो अंगूर बन जायेंगे ।

एक छोटे बच्‍चे को कुछ ऐसे समझाया

पता नहीं उसने मैंडम को क्‍या बताया 


Wednesday, April 29, 2020


दो प्रार्थनायें

I. मन हो जिसका सच्चा

मन हो जिसका सच्चा
विश्‍वास हो जिसका पक्का
ईश्वर उसके साथ ही होता
हर पल उसके साथ ही होता।

1. खुद भूखा रहकर भी जो
   औरों  की भूख मिटाता
   हृदय - सागर उसका
   कभी न खाली होता।
   ईश्वर उसके साथ ही होता
   हर पल उसके साथ ही होता ।

2.  अर्न्तवाणी सुनकर जो
   काज प्रभु का करता
   मुक्त रहे चिंता से
   शांत सदा वो रहता।
   ईश्वर उसके साथ ही होता
   हर पल उसके साथ ही होता ।

3. जीवन रहते ही जो
   मौत का अनुभव करता
   संसार में रहकर भी    
   संसार से दूरी रखता।
   ईश्वर उसके साथ ही होता     
   हर पल उसके साथ ही होता ।

4. अन्याय कहीं भी हो
   कैसा भी हो किसी का
   खुद का दाँव लगाकर
  हिम्मत से जो लड़ता
   ईश्वर उसके साथ ही होता
   हर पल उसके साथ ही होता ।

5. दु:ख और सुख में जो दि
   ध्यान प्रभु का रखता
   दूर रहे दुविधा से
   नहीं व्यापत उसमें जड़ता।
   ईश्वर उसके साथ ही होता
   हर पल उसके साथ ही होता ।


  II. 

सौंप दो प्यारे प्रभु को
सब सरल हो जाएगा
जीना सहज हो जाएगा
मरना सफल हो जायेगा।

1. जिन्दगी की राह में
   ऑंधियां तो आयेंगी
   उसकी ही रहमत से
   हमको हौसला मिल पायेगा।

2. सोचता है हर कोई
   अपने मन की बात हो
   होगा जो मंजूर उसको
   वक्त पर हो जाएगा।

3. मोड़ ले संसार वाले
   नजरें तुमसे जिस घडी
   हो यकीं तो आसरा
   उसका तुम्हें मिल जाएगा।

4. माँगने से मिलता है
   केवल वही जो माँगा था
   कुछ न माँगो तो
   खुदा खुद ही तुम्हें मिल जाएगा।




Saturday, August 3, 2019

हैप्पी फ्रेंडशिप डे

सच्चा दोस्त वो होता है
जो हमारी गलतियां तो हमें बतलाता है
पर सबके सामने
उनका मख़ौल नहीं बनाता
हमको ज़लील नहीं करता,
कितनी भी देर हो जाये
वो हमारा इंतज़ार करता है
रूठता है-डांटता है, गुस्सा भी हो जाता है
पर वो हमें मनाता भी है और
जल्द ही खुद भी मान जाता है,
हमारी ज़िंदगी आसान करने के लिए
खुद को जोखिम में डाल लेता है
खुशी और सुख में शामिल चाहे न हो पाए
पर  परेशानी में हमेशा साथ खड़ा होता है
बीमारी में अस्पताल मिलने जरूर आता है
उससे कुछ भी कभी भी बात कर सकते हैं
वो हमें नापता-तौलता या परखता नही है,
दोस्ती का कोई खास दिन नहीं होता
उसे तो , ऐ दोस्त ;
प्रतिपल जीना पड़ता है ।

Sunday, September 20, 2015














मैं कोयल हो मैं कौआ हूं 

हम दोनों एकसे पाखी हैं 
तुम कूकू कूकू करती हो 
मैं कांव कांव करता हूं; 
हमको लड़वाने की कोशिश में 
जग वालों ने यह बात रची -
तुम मीठा सुर लगाती हो
 मैं कड़वी जुबां चलाता हूं  
हम दोनो काले काले है 
पर सच्चेे दिल वाले हैं; 
अपनी अपनी बोली हमारी 
पर एक हमारी भाषा है 
दुनिया में हो भाईचारा 
यही हमारी आशा है; 
भोर हुई उठ जाते हैं 
सांझ हुई सो जाते हैं 
एक पेड़ पर रह लेते
एक गगन में उडते हैं, 
चाहे नहीं दिमाग हमारे 
दिल तो हम भी रखते है 
इंसां से बेहतर हैं हम 
आपस में नहीं लड़ते हैं,
चोंच में जितना आ जाता 
उतना ही खा लेते हैं 
नहीं जमा करते कुछ भी
लोभ नहीं हम करते हैं; 
श्राद्ध में होती पूजा मेरी 
बाकी दिन कंकड़ पड़ते हैं 
कोयल दीदी तुम ही बतलाओ 
ये सब क्यूं वे करते हैं !

Tuesday, April 14, 2015














बाल उलझे रहें 
हाल सुलझा रहें 
यह कैसे संभव है
मन में हो वेदना 
तन चंगा रहे 
यह कैसे संभव है
घर में झगड़ा हुआ
दफतर शांत रहे
यह कैसे संभव है
कुदरत उजड़ती रहे
विकास होता रहे
यह कैसे संभव है
दिन में गलतियां हो
रात नींद आया करे
यह कैसे संभव है
है सब कुछ गुंथा हुआ
तो देखें अलग अलग
यह कैसे संभव है !